लाल मिट्टी/ गेरू का कमाल
गेरू मिट्टी-- - इसका स्वाद फिका होता है. - इसकी प्रकृति ठंडी और रुखी होती है. - मिटटी के बर्तनों में जैसे मटका, कुल्हड़ आदि में इसी का लेप होता है, जो सूक्ष्म मात्रा में पेट में जाता है और औषधीय लाभ पहुंचाता है. - लाल रंग की इस मिट्टी का प्रयोग मिट्टी खाने वाले बच्चों को मिट्टी के दुष्पभावों से बचाने के लिए किया जाता है। गेरू को घी में तलकर शहद मिलाकर देने से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार आता है। जिनका स्वास्थ्य मिट्टी खाने की आदत के कारण बिगड़ गया है। - गेरू और तिल के फूलों को साथ में पीसकर इसका सर पर लेप गंजेपन से बचाता है. - इसका लेप ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचाता है. द्वार पर, रसोई घर या भण्डार गृह के द्वार पर इसका स्वस्तिक बना दे. इससे हानिकारक तरंगे यह अवशोषित कर लेगा. - गर्भवती के पेट पर ग्रहण काल में इसका लेप करें. - यह रक्त प्रदर को रोकती है.२ ग्राम गेरू और दस ग्राम फिटकरी को पीस कर इसकी एक ग्राम मात्रा सुबह शाम दूध के साथ ले. - गेरू को आग में तपाकर पानी में डाल कर ठंडा करे. इस पानी को पिलाने से उल्टी रुक जाती है. - रंगोली बनाने के लिए पहले इसका लेप क...