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जाम्भोजी के 29 नियम

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सन्त जाम्भोजी के 29 नियम उणतीस धर्म की आंकड़ी, हृदय धरियो जोय। जम्भेशेवर कृप करें, बहुरि जभ न होय। " ----------------------------------- १) प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करना। २) ३० दिन जनन - सूतक मानना। ३) ५ दिन रजस्वता स्री को गृह कार्यों से मुक्त रखना। ४) शील का पालन करना। ५) संतोष का धारण करना। ६) बाहरी एवं आन्तरिक शुद्धता एवं पवित्रता को बनाये रखना। ७) तीन समय संध्या उपासना करना। ८) संध्या के समय आरती करना एवं ईश्वर के गुणों के बारे में चिंतन करना। ९) निष्ठा एवं प्रेमपूर्वक हवन करना। १०) पानी, ईंधन व दूध को छान-बीन कर प्रयोग में लेना। ११) वाणी का संयम करना। १२) दया एवं क्षमाको धारण करना। १३) चोरी, १४) निंदा, १५) झूठ तथा १६) वाद - विवाद का त्याग करना। १७) अमावश्या के दिनव्रत करना। १८) विष्णु का भजन करना। १९) जीवों के प्रति दया का भाव रखना। २०) हरा वृक्ष नहीं कटवाना। २१) काम, क्रोध, मोह एवं लोभ का नाश करना। २२) रसोई अपने हाध से बनाना। २३) परोपकारी पशुओं की रक्षा करना। २४) अमल, २५) तम्बाकू, २६) भांग २७) मद्य तथा २८) नील का त्याग करना। २९) बैल को बधिया नहीं करवाना।

अगरबत्ती का धुंआ एक धीमा जहर

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  अगरबत्ती का धुंआ एक धीमा जहर कैसे हो सकता है आइए जानते हैं =] >शास्त्रो में बांस की लकड़ी को जलाना वर्जित है, किसी भी हवन अथवा पूजन विधि में बांस को नही जलाते हैं। यहां तक कि चिता में भी बांस की लकड़ी का प्रयोग वर्जित है। अर्थी के लिए बांस की लकड़ी का उपयोग होता है लेकिन उसे भी नही जलाते शास्त्रों के अनुसार बांस जलाने से पित्र दोष लगता है। क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण है? =] > बांस में लेड व हेवी मेटल प्रचुर मात्रा में होते है। लेड जलने पर लेड आक्साइड बनाता है जो कि एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है हेवी मेटल भी जलने पर ऑक्साइड्स बनाते है। *लेकिन जिस बांस की लकड़ी को जलाना शास्त्रों में वर्जित है यहां | तक कि चिता में भी नही जला सकते, उस बांस की लकड़ी को हमलोग रोज़ अगरबत्ती में जलाते हैं।* अगरबत्ती के जलने से उत्पन्न हुई सुगन्ध के प्रसार के लिए फेथलेट नाम के विशिष्ट केमिकल का प्रयोग किया जाता है। यह एक फेथलिक एसिड का ईस्टर होता है। यह भी स्वांस के साथ शरीर मे प्रवेश करता है। =] > इस प्रकार अगरबत्ती की तथा कथित सुगन्ध न्यूरोटॉक्सिक एवम ...

ओमेगा - 3 शाकाहारी एंव मांसाहारी दोनों के लिये

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ओमेगा -3  शाकाहारी एंव मांसाहारी लोगो के लिये शाकाहारी  और मांसाहारी दोनों स्रोतों से हमें ओमेगा-3 फैटी एसिड मिलता है। यह अखरोट जैसे सूखे मेवों, अलसी, सूरजमुखी, सरसों के बीज, कनोडिया या सोयाबीन, स्प्राउट्स, टोफू, गोभी, हरी बीन्स, ब्रोकली, शलजम, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्ट्रॉबेरी, रसभरी जैसे फलों में काफी मात्रा में पाया जाता हैै। ट्यूना, सामन, हिलसा, सार्डिन जैसी मछलियां, शैवाल, झींगा जैसे सी-फूड ओमेगा-3 के ईपीए और डीएचए प्रकार के अच्छे स्रोत हैं। इसके अलावा गाय का दूध, मूंगफली, अंडे का सेवन भी फायदेमंद है। इस्तेमाल का तरीका एक स्वस्थ व्यक्ति को वजन के हिसाब से ओमेगा-3 फैटी एसिड का सेवन करना चाहिए। डाइटीशियन या डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि अधिक फैट लेने से यह मोटापे का कारण बनता है। फ्लैक्स जैसे बीज पीस कर पाउडर बनाएं और इसका एक-डेढ़ चम्मच सुबह खाली पेट पानी के साथ खाएं, लाभ होगा। इन पिसे बीजों को सलाद के ऊपर छिड़क कर या दही-रायते मेंे मिला कर भी खा सकते हैं। ओमेगा-3 युक्त ऑयल में खाना बनाने से इसकी आपूर्ति स्वत: ही हो जाती है। जहां तक सी-फूड का सवाल है, अमेरिकन हार्...