मृत्यु के 14 प्रकार एक नहीं 14 होते हैं राम रावण युद्ध चल रहा था, तब अंगद रावण को बोले- तू तो मरा हुआ है, तुझे मारने से क्या फायदा!?!?!? *रावण बोला– मैं जीवित हूँ, मरा हुआ कैसे?* अंगद बोले सिर्फ साँस लेने वालों को जीवित नहीं कहते- साँस तो लुहार का भाता भी लेता है *…*.. तब अंगद ने 14 प्रकार की मृत्यु बतलाई *…*.. * अंगद द्वारा रावण को बतलाई गई, ये बातें आज के दौर में भी लागू होती हैं …*.. यदि किसी व्यक्ति में इन 14 दुर्गुणों में से एक दुर्गुण भी आ जाता है तो वह मृतक समान हो जाता है !! * विचार करें कहीं यह दुर्गुण हमारे पास तो नहीं हैं, कि हमें मृतक समान माना जाये …*.. *1) कामवास :-* जो व्यक्ति अत्यन्त भोगी हो, कामवासना में लिप्त रहता हो, जो संसार के भोगों में उलझा हुआ हो, वह मृत समान है; जिसके मन की इच्छाएं कभी खत्म नहीं होती और जो प्राणी सिर्फ अपनी इच्छाओं के अधीन होकर ही जीता है, वह मृत समान है; वह अध्यात्म का सेवन नहीं करता है, सदैव वासना में लीन रहता है !! *2) वाममार्गी :-* जो व्यक्ति पूरी दुनिया से उल्टा चले, जो संसार की हर बात के पीछे नकारात्मकता खोजता हो; नियमों, परंपराओं और ...