आत्मज्ञानी इतना हँसते क्यों हैं? - एक ज़ेन कथा
एक ज़ेन मठ था जिसमें सभी शिष्य अपने गुरु के पास रह कर सीखते थे। उन शिष्यों में, सबसे नया आया हुआ एक शिष्य सबसे ज्यादा सक्रिय था और बहुत सारा काम करता था। यदि गुरु को कुछ चाहिये होता, तो वह सबसे पहले गुरु के पास पहुँच जाता। गुरु द्वारा बताया गया कोई भी कार्य वो तुरंत ही कर देता। वो सबसे अंत में सोता और सबसे पहले जाग जाता, और रोजमर्रा के कामकाज शुरू कर देता था। गुरु ने यह सब देखा और एक दिन उन्होंने उससे पूछा, "यहाँ आने से पहले, तुम कहाँ थे"? शिष्य ने उत्तर दिया, "मैं शालिंग क्यू के पास सीख रहा था"। "अच्छा, शालिंग क्यू ! मैंने उनके बारे में सुना है। एक बार जब वे एक पुल पर से गुजर रहे थे तो फिसल गये और पानी में गिर गये थे। ठीक है न "? "जी, गुरुदेव"। "क्या तुम्हें पता है कि उन्हें उसी क्षण आत्मज्ञान प्राप्त हो गया था"? "मैं ये नहीं जानता पर अपने आत्मज्ञान के बारे में उन्होंने एक कविता लिखी है"। "क्या तुम्हें वो कविता याद है"? "जी, गुरुदेव, मुझे याद है"। "तो मुझे सुनाओ"! "मुझे एक मोती मिला है, बहु...