चरित्र ही इस जीवन में सबकुछ है
एक पुरूष और महिला का चरित्र कैसे निर्धारित होता है ? स्वामी विवेकानंद अमेरिका के एक बाजार से गुजर रहे थे। उन्होंने साधुओं की वेशभूषा धारण कर रखी थी। वहां के लोगों के लिए यह विचित्र वेषभूषा थी। उन्हें देख एक अमेरिकन महिला ने अपने पति से पूछा, 'क्या यह सभ्य पुरुष हैं।' उसके पति ने तो इसका कोई उत्तर नहीं दिया, लेकिन स्वामी जी बोले, 'अमेरिका में एक दर्जी सुंदर वेषभूषा सिल कर किसी को भी सभ्य पुरुष बना देता है, परंतु भारत में चरित्र ही किसी को सभ्य पुरुष बनाता है।' स्वामी जी ने जीवन में चरित्र की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा था- 'इच्छाशक्ति का सतत अभ्यास करते जाओ, यह तुम्हें ऊंचा उठाएगी। यह इच्छाशक्ति सर्वशक्तिमान है। हर तरह की कठिनाई को पार करके आगे बढ़ने की शक्ति हमें अपने चरित्र से ही मिलती है।' मनुष्य का चरित्र इससे तय होता है कि किसी कार्य के प्रति उसकी प्रवृत्ति कैसी है। वह जो कुछ बनता है, अपने सोच-विचार से बनता है। अत: जो हम सोचते हैं उसका ध्यान रखें। क्योंकि हम जो प्रत्येक कर्म करते हैं और प्रत्येक विचार जिसका हम चिंतन करते हैं, वे...